मोबाइल कंपनियों के 25 फीसदी दावे झूठे

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Published: Sunday, April 1, 2012, 11:14 [IST]

Mobile Users
दिल्ली (ब्यूरो)। देश में मोबाइल की संख्या तेजी से बढ़ रही है लेकिन इसके साथ एक और हकीकत सामने आई है कि मोबाइल धारक भले ही एक अरब पहुंच चुके हैं, लेकिन बंद मोबाइल की सख्या 25 फीसदी पहुंच चुकी है। यानी एक अरब में 25 करोड़ मोबाइल बंद हैं। यूं समझ लीजिए सिम लिया कुछ दिन चलाया फिर फेंक दिया। यह सब इसकी का नतीजा है। मुंबई में सबसे ज्यादा मोबाइल फोन नंबर बंद हैं। मुंबई में कुल मोबाइल फोन नंबरों में से सिर्फ 62 फीसदी ही चालू हैं।

भले ही तेजी से बढ़ रहे मोबाइल फोन ग्राहकों की तादाद जल्द ही एक अरब के आंकड़े तक पहुंच जाए, लेकिन इसमें सबसे बड़ी हकीकत यह भी है कि देश में बंद पड़े मोबाइल फोन नंबरों की संख्या भी बहुत तेजी से बढ़ रही है। दरअसल, देश में मोबाइल फोन ग्राहकों की संख्या भले ही 90 करोड़ से ज्यादा बताई जा रही हो लेकिन हकीकत में इसमें से 65 करोड़ से ज्यादा मोबाइल फोन नंबर ही चालू हैं। बाकी करीब 25 करोड़ (24,97,60,000) मोबाइल फोन नंबर बंद पड़े हैं।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई के मुताबिक अभी देश में सक्रिय ग्राहक 65 करोड़ से ज्यादा हैं। इस आंकड़े का आकलन विजिटर लोकेशन रजिस्टर यानी वीएलआर डाटा के आधार पर किया गया है। यह डाटा सक्रिय ग्राहक या चालू मोबाइल फोन नंबरों की संख्या को बताता है। इसके मुताबिक ग्राहक महीने में एक बार भी फोन या फिर एसएमएस भी करता है तो वह इस डाटा में शामिल हो जाता है। दिलचस्प बात यह है कि इन आंकड़ों में उभर कर आता है कि मोबाइल फोन ग्राहकों की संख्या के मामले में अव्वल माने जाने वाले महानगर सक्रिय ग्राहकों की सूची में पिछड़े हुए हैं।

मुंबई में सबसे ज्यादा मोबाइल फोन नंबर बंद हैं। मुंबई में कुल मोबाइल फोन नंबरों में से सिर्फ 62 फीसदी ही चालू हैं। जबकि दिल्ली (74 फीसदी) और कोलकाता (67 फीसदी) भी इस मामले में पिछड़े हुए हैं। जबकि छोटे और आर्थिक दृष्टि में कमजोर राज्य इस मामले में महानगरों को पछाड़ रहे हैं। जम्मू कश्मीर में 82 फीसदी, असम में 80 फीसदी तो मध्य प्रदेश में 79 फीसदी मोबाइल फोन नंबर चालू हैं। यहां बताते चलें कि अब सक्रिय ग्राहकों की संख्या बढ़ाने के लिए नियमों में बदलाव कर दिया गया है। अब दो महीने में अगर आप अपने मोबाइल फोन नंबर से कॉल और एसएमएस नहीं करते हैं तो आपका नंबर बंद हो सकता है। चालू नंबरों को बढ़ाने और फालतू नंबरों को खत्म करने के मकसद से यह नियम बनाया गया है। कंपनियों ने इस संबंध में भी ट्राई से गुजारिश की थी।

Story first published: Sunday, April 01, 2012, 11:14 [IST]
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